बुखार शरीर का किसी संक्रमण (infection) से लड़ने का सामान्य तरीका है। आम वायरल बुखार अक्सर दो-तीन दिन में अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन भारत में बुखार डेंगू, मलेरिया या टाइफ़ाइड की शुरुआत भी हो सकता है — इन बीमारियों में समय पर डॉक्टर को दिखाना बहुत फ़र्क डालता है।
इस लेख में जानिए कि कब घर पर ध्यान रखना काफ़ी है, किन लक्षणों में आज ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए, और क्लिनिक में क्या उम्मीद करें।
कब बुखार आमतौर पर गंभीर नहीं होता?
अक्सर यह हल्का वायरल बुखार होता है, जब:
बुखार एक-दो दिन रहे और आराम व पानी से कम हो जाए।
आप खा-पी पा रहे हों, पेशाब सामान्य हो और आप होश में और चुस्त हों।
कोई दाने (rash), तेज़ दर्द, खून आना या साँस की तकलीफ़ न हो।
आराम करें, खूब तरल लें (पानी, ORS, नारियल पानी, दाल का पानी) और दिन में दो-तीन बार तापमान नापकर लिख लें — डॉक्टर के लिए यह बहुत काम आता है।
डॉक्टर को कब दिखाएँ?
डॉक्टर को दिखाएँ — शुरुआत के लिए जनरल फ़िज़िशियन सही रहते हैं — अगर:
बुखार 2–3 दिन से ज़्यादा रहे, या बार-बार लौटे।
तापमान 103°F (39.4°C) या उससे ज़्यादा हो, या उतर ही न रहा हो।
कँपकँपी के साथ ठंड लगे, या बुखार तय समय पर आता-जाता हो।
बदन दर्द इतना हो कि उठा न जाए, आँखों के पीछे दर्द हो या नए दाने दिखें।
मरीज़ छोटा बच्चा, 60 साल से ऊपर, गर्भवती हो, या उसे डायबिटीज़, दिल, किडनी, फेफड़ों की बीमारी या कमज़ोर इम्युनिटी हो — ऐसे में पहले ही दिन दिखाएँ।
बच्चों के लिए बाल रोग विशेषज्ञ (paediatrician) सबसे अच्छे हैं।
खतरे के लक्षण: तुरंत मदद लें
तुरंत अस्पताल जाएँ या 112 पर कॉल करें अगर: पेट में तेज़ दर्द हो, बार-बार उल्टी हो, मसूड़ों या नाक से खून आए, काला मल या उल्टी में खून हो, साँस लेने में तकलीफ़ हो, हाथ-पैर ठंडे और चिपचिपे हों, पेशाब बहुत कम हो, बहुत नींद या बेचैनी हो, गर्दन अकड़ जाए, या दौरा (fit) पड़े।
डेंगू में ये लक्षण अक्सर तब दिखते हैं जब बुखार उतर रहा होता है (दिन 3 से 7)। इसलिए "बुखार उतर गया" का मतलब हमेशा यह नहीं कि खतरा टल गया।
डेंगू, मलेरिया या टाइफ़ाइड? डॉक्टर किन बातों पर ध्यान देते हैं
डेंगू
Aedes मच्छर से फैलता है, जो दिन में काटता है। अचानक तेज़ बुखार, बदन और जोड़ों में तेज़ दर्द, सिरदर्द, आँखों के पीछे दर्द, जी मिचलाना और कभी-कभी दाने। अगले दिनों में platelets कम हो सकते हैं।
मलेरिया
Anopheles मच्छर से फैलता है, जो रात में काटता है। बुखार के साथ कँपकँपी, ठंड और फिर पसीना — कभी-कभी एक तय चक्र में। मलेरिया की पुष्टि खून की जाँच से होती है और इसका खास इलाज है — अंदाज़े से इलाज न करें।
टाइफ़ाइड
दूषित खाने-पानी से फैलता है। बुखार कई दिनों में धीरे-धीरे बढ़ता है, साथ में थकान, पेट दर्द, सिरदर्द, भूख न लगना, और कभी कब्ज़ या दस्त।
डॉक्टर कौन-सी जाँचें करवा सकते हैं?
डॉक्टर आपके लक्षण और बुखार के दिन देखकर जाँच तय करते हैं। आम जाँचें:
CBC (complete blood count), जिसमें platelets भी शामिल हैं।
Dengue NS1 antigen (शुरुआती दिनों में) या dengue IgM (लगभग चौथे-पाँचवें दिन के बाद)।
मलेरिया की rapid test या smear जाँच।
टाइफ़ाइड के लिए blood culture। Widal test आम है, पर अकेले उस पर भरोसा भ्रामक हो सकता है, इसलिए डॉक्टर उसे सावधानी से पढ़ते हैं।
ज़रूरत हो तो पेशाब की जाँच, liver function या chest X-ray।
तब तक घर पर क्या करें
नियमित रूप से तरल लेते रहें — डेंगू में पानी की कमी बड़ा खतरा है।
बुखार के लिए आमतौर पर paracetamol दिया जाता है; लेबल पर लिखी खुराक या डॉक्टर की सलाह मानें।
डेंगू की आशंका हो तो ibuprofen, aspirin या दूसरी दर्द-निवारक दवाएँ न लें, जब तक डॉक्टर न कहें — इनसे खून बहने का खतरा बढ़ सकता है।
अपने आप antibiotic न लें। वायरल बुखार में ये काम नहीं करतीं और बैक्टीरियल बुखार की असली वजह छिपा सकती हैं।
बुखार बहुत तेज़ लगे तो गुनगुने (ठंडे नहीं) पानी से पट्टी करें।
मच्छरों से बचें: मच्छरदानी, repellent, पूरी बाँह के कपड़े, और घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
अपने पास डॉक्टर ढूँढें
अगर समझ न आए कि डॉक्टर को दिखाना है या नहीं, तो Nirogo पर हिन्दी, अंग्रेज़ी या अपनी भाषा में अपनी तकलीफ़ बताइए। हम सही डॉक्टर तय करेंगे और आपके शहर के मिलते-जुलते क्लिनिक आपसे संपर्क करेंगे — मुफ़्त।


