डायबिटीज़ भारत की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। राष्ट्रीय ICMR-INDIAB अध्ययन का अनुमान है कि 2021 में भारत में 10 करोड़ से ज़्यादा लोग डायबिटीज़ के साथ जी रहे थे — और उससे भी ज़्यादा लोगों को prediabetes था, यानी शुगर सामान्य से ज़्यादा पर अभी डायबिटीज़ की सीमा से कम।

मुश्किल बात यह है कि टाइप 2 डायबिटीज़ सालों तक चुपचाप रह सकती है। आँखों, किडनी, नसों और दिल को नुकसान पहुँचने से पहले इसे पकड़ लेना बहुत फ़र्क डालता है।

डायबिटीज़ के शुरुआती लक्षण

  • बार-बार पेशाब आना, रात में भी।

  • बहुत प्यास लगना या मुँह सूखना।

  • खाने के कुछ देर बाद ही फिर भूख लगना।

  • थकान और कमज़ोरी।

  • बिना कोशिश के वज़न घटना।

  • धुंधला दिखना।

  • कट और घाव देर से भरना, या त्वचा, मसूड़ों या पेशाब में बार-बार इन्फ़ेक्शन।

  • पैरों में झनझनाहट, जलन या सुन्नपन।

टाइप 2 डायबिटीज़ वाले कई लोगों में इनमें से कोई भी लक्षण नहीं होता। इसीलिए जाँच ज़रूरी है।

किसे जाँच करवानी चाहिए?

  • 30 साल से ऊपर का हर व्यक्ति, नियमित जाँच के तौर पर।

  • जिसके माता-पिता या भाई-बहन को डायबिटीज़ हो।

  • ज़्यादा वज़न वाले लोग, खासकर पेट के आसपास चर्बी हो तो।

  • PCOS वाली महिलाएँ, या जिन्हें गर्भावस्था में डायबिटीज़ हुई हो।

  • हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोग।

  • जिसे ऊपर बताए लक्षण हों।

कौन-सी जाँचें डायबिटीज़ की पुष्टि करती हैं?

डॉक्टर लैब की खून की जाँचें करवाते हैं। आम जाँचें:

  • Fasting plasma glucose — 8 घंटे खाली पेट के बाद। 126 mg/dL या उससे ज़्यादा डायबिटीज़ का संकेत है।

  • HbA1c — लगभग तीन महीने की औसत शुगर। 6.5% या ज़्यादा डायबिटीज़ का संकेत है; इससे थोड़ा कम होना prediabetes हो सकता है।

  • OGTT (oral glucose tolerance test) — ग्लूकोज़ पीने के 2 घंटे बाद शुगर। 200 mg/dL या ज़्यादा डायबिटीज़ का संकेत है।

  • आम लक्षणों के साथ random glucose 200 mg/dL या ज़्यादा।

आमतौर पर नतीजे की पुष्टि दोबारा या दूसरी जाँच से की जाती है। घर का glucometer निगरानी के लिए उपयोगी है, पर डायबिटीज़ की पहचान लैब जाँच और डॉक्टर की सलाह से ही होनी चाहिए।

टाइप 1 और टाइप 2 — फ़र्क क्या है?

टाइप 2 सबसे आम है। शरीर insulin का ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाता, और यह जीन, वज़न, कम गतिविधि और खान-पान से जुड़ा है। टाइप 1 आमतौर पर बच्चों या युवाओं में, अक्सर अचानक शुरू होती है और शुरू से insulin की ज़रूरत होती है। प्यास और बार-बार पेशाब के साथ किसी बच्चे का अचानक वज़न घटना, उल्टी या बहुत नींद आना — तुरंत इलाज की ज़रूरत है।

अगर prediabetes या डायबिटीज़ है

  • prediabetes वाले कई लोग नियमित गतिविधि (जैसे ज़्यादातर दिनों में 30 मिनट तेज़ चलना), कम मीठे पेय और कम मैदे वाले संतुलित भोजन, और ज़्यादा वज़न हो तो वज़न घटाकर डायबिटीज़ को टाल या रोक सकते हैं।

  • डायबिटीज़ है तो डॉक्टर इलाज की योजना बनाएँगे और आँख, किडनी, पैर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जाँच करवाएँगे।

  • डॉक्टर से पूछे बिना डायबिटीज़ की दवा या insulin कभी बंद न करें, न बदलें।

किस डॉक्टर को दिखाएँ?

शुरुआत जनरल फ़िज़िशियन या डायबेटोलॉजिस्ट से करें। शुगर काबू में न आए तो एंडोक्राइनोलॉजिस्ट मदद करते हैं, और डाइटीशियन आपकी खाने की आदतों के हिसाब से भोजन की योजना बना सकते हैं।

Nirogo पर अपनी भाषा में लक्षण बताइए, और आपके शहर के मिलते-जुलते क्लिनिक आपसे संपर्क करेंगे — मुफ़्त।